समाजसेवी उमर त्यागी ने खून देकर की मिसाल कायम

मनु टाइम्स – सच्चाई की आवाज
रिपोर्टर मौहम्मद फ़ैज़ान
जिला बिजनौर के नगर स्योहारा के उमर त्यागी ने अपने एक अज़ीज़ दोस्त के जन्मदिन पर एक ज़रूरतमंद मरीज को खून दान करके ऐसा तोहफा दिया। जो मिसाल बन गया। उन्होंने इस नेक काम को “खून का सदका”  करार दिया और यह दिन उनके जीवन में हमेशा के लिए यादगार बन गया।
क्या है पूरा मामला जानिए-
घटना की शुरुआत उस वक्त हुई जब बिजनौर के एक अस्पताल में एक गर्भवती महिला को तत्काल खून की ज़रूरत पड़ी। महिला का ब्लड ग्रुप A+  था और अस्पताल में उस वक्त उपलब्ध नहीं था। मरीज की हालत नाज़ुक होती जा रही थी, और परिवार वालों के पास कोई विकल्प नहीं था। तभी किसी ने उमर त्यागी से संपर्क किया। जिन्हें पता चला कि उनका ब्लड ग्रुप मेल खा रहा है।
जैसे ही उमर को यह खबर मिली, उन्होंने एक पल की भी देर किए बिना अस्पताल पहुंचकर फौरन खून देने की इच्छा जताई। जब उनसे पूछा गया कि आज तो आप किसी पार्टी या प्रोग्राम में होंगे। उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया – आज मेरे दोस्त का जन्मदिन है, और मैंने ठाना था कि इस दिन को कुछ ऐसा करना है, जो सिर्फ खुशी न दे, बल्कि किसी की जान भी बचा सके। इसी लिए मैंने अपने “खून का सदका ” दिया- यही मेरा सबसे अच्छा तोहफा है।
उमर त्यागी के इस कदम से मां और बच्चे की जान बच गई, और डॉक्टरों ने बताया कि कुछ देर की भी देरी जानलेवा हो सकती थी। उमर की संवेदनशीलता और तत्परता ने एक परिवार को तबाही से बचा लिया।
सोशल मीडिया और दोस्तों में खुशी की लहर –
इस बात की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और स्योहारा शहर में फैली। लोग उमर की तारीफ करने लगे। स्थानीय युवाओं के लिए वे प्रेरणा बन गए हैं। वहीं उनके दोस्तों ने भी कहा कि उमर जैसा दोस्त मिलना नसीब की बात होती है। जिसने जन्मदिन को सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि इंसानियत का जज़्बा बना दिया।
उमर त्यागी ने लिया प्रण-
उमर त्यागी ने बताया कि वे जब तक जिंदा रहेंगे 11 जुलाई को आगे भी इसी तरह रक्तदान करेंगे । उनका मानना है कि खून देना न सिर्फ इंसानियत है, बल्कि अल्लाह की राह में दिया गया सदका है। जो कई जिंदगियों को बचा सकता है।
11 जुलाई अब सिर्फ उनके दोस्त का जन्मदिन नहीं, बल्कि इंसानियत दिवसबन गया है। एक ऐसा दिन जब एक युवा ने यह दिखा दिया कि सच्ची खुशी सिर्फ देने में है, और किसी की जान बचाना दुनिया का सबसे बड़ा तोहफा हो सकता है।