भगवान शिव को भांग और धतूरा क्यों चढ़ते है, इसका कारण जानकर आप हौरान हो जायेगे

मनु टाइम्स – सच्चाई की आवाज
महाशिवरात्रि की आप सभी को हाार्दिक शुभकामनाएं। पंचाग के अनुसार हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस तिथि पर भगवान शिव और देवी पर्वती का विवाह हुआ था। यही कारण है कि हिन्दू धर्म मे यह दिन विशेष महत्व रखता है।
आज आपको बातते है कि भगवान शिव को भांग और धतूरा क्यों चढ़ते है, इसका कारण जानकर आप हौरान हो जायेगे। पौराणिक कथा के अनुसार जब देवातओं और दानवो के बीच समुद्र मंथन हुआ था तो विष उत्पन्न हुआ था। यह विष इतना भयानक था कि इसकी अग्नि से दसांे दिशाएं जलने लगी। इस समय इस विष के प्रकोप से सभी को बचाने के लिए भगवान शिव जी ने यह विष पी लिया। विष की अग्नि से भगवान शिव जी का गला नीला हो गया , और वह अचेत हो गये। इस स्थिति को देखकर सभी चिंतित हो गये। तब भगवान शिव जी के सिर से हलाहल की गर्मी को दूर करने के लिए भांग और धतूरे को रखा गया, और इसका लेप उनके पैरो के तलवे पर किया गया। इस उपाय के बाद उनका विष शांत हो गया। तभी से भगवार शिव जी को भांग और धतूरा चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
भगवान शिव जी भांग और धतूरा अर्पित करना जीवन में शुभ संकेत देता है- जीवन में क्या होता लाभ है भांग और धूतरा अर्पित करने से आपको बताते है
भांग और धतूरा प्रकृति में कड़वी और जहरीली होती है , फिर भी ये भगवान शिव जी पर चढ़ाया जाता है। असल में भगवान शिव जी को भांग और धतूरा अर्पित करने का अर्थ है कि हम अपनी सभी बुराईयों और मन की कड़वाहट का त्याग कर रहे है। भगवान शिव जी को हम ये चीजें अर्पित कर हम अपने मन को निर्मल कर रहें है।
शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करने के पीछे ज्योतिषीय कारण यह भी माना जाता है कि धतूरे को राहु का कारक माना जाता है। ऐसे में भगवान शिव को धूतरा अर्पित करने से राहु संबधित दोष जैसे कालसर्प , पितृदोष आदि से छुटकारा मिल जाता है। महाशिवरात्रि पर आप सभी शिवंलिग पर भांग और धूतरा अर्पित करे। महाकाल आप सभी की मनोकामना पूर्ण करें।